वृश्चिक लग्न के लिए शुभ और लक्की स्टोन कौन से है
वृश्चिक एक जलीय राशि है, और चन्द्रमा एक पूर्ण जलीय ग्रह। इसलिए यदि वृश्चिक लग्न हो और लग्न में चन्द्रमा पड़ा हो तो फिर जय सीयाराम। पूरी उम्र सोचने में ही निकल जाती है कि ऐसा क्या करें कि फायदा हो।
वृश्चिक राशि यह हठी और दिनबली होती है। वृश्चिक राशि के लोगों को स्थिर और स्वतंत्र कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। जिन कार्यों में व्यक्तिगत साहस का मूल्य हो, उनमें ये अधिक सफल होते हैं।
लग्नेश का रत्न मूंगा कब धारण करना चाहिए
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए इस लग्न के लोगों को मूंगा धारण करना चाहिए। वैसे यहां यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि मंगल लग्नेश होने के साथ ही षष्ठेश अर्थात् रोग और ऋण का भी स्वामी है। इसलिए यदि कुंडली में मंगल अच्छी स्थिति में हो तो मूंगा धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि मूंगा आत्मबल तो बढ़ायेगा लेकिन वह रोग और ऋण की मात्रा में भी इजाफा कर सकता है। इसलिए मंगल की भावों और राशियों में स्थिति के अनुसार ही मूंगा धारण करना उचित होगा।
बिजनेस में प्रोग्रेस के लिए मानिक रत्न पहने
पाप ग्रह जब केन्द्र के स्वामी हो तो वे शुभ फल देते हैं। इसलिए मैं वृश्चिक लग्न के लिए सूर्य को सबसे शुभ ग्रह मानता हूं। जिन लोगों को बिजनेस में सफलता नहीं मिल रही हो और वृश्चिक लग्न हो उन्हें माणिक्य अवश्य धारण करना चाहिए। ज्यादा तो मैं नहीं कह सकता लेकिन बिजनेस में गतिशीलता अवश्य आयेगी और बिजनेस बंद नहीं होगा।
भाग्य वृद्धि के लिए वृश्चिक लग्न के लोगों को मोती पहनना चाहिए
वृश्चिक लग्न में तीसरा सबसे महत्वपूर्ण रत्न मोती है। क्योंकि चन्द्रमा भाग्येश है। चन्द्रमा यदि पक्षबलहीन हो या फिर पाप ग्रहों से दृष्ट या युति करता हो तो जातक के भाग्योदय में विलम्ब होता है। इसके निवारण के लिए शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार को या पूर्णिमा को मोतियों की माला गले में धारण करने से भाग्यवृद्धि होती है।
क्या वृश्चिक लग्न के लोग नीलम पहन सकते हैं
तृतीयेश और चतुर्थेश शनि का स्टोन नीलम भी वृश्चिक लग्न के लोग धारण कर सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें कुंडली का अवलोकन अवश्य करवा लेना चाहिए।
रत्न के संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए वेबसाइट पर दिए गए व्हाट्सएप पर संपर्क करें।
-- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुर जी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।



