ब्रांड बनाना है तो माणिक पहनना चाहिए
राजाओं का रत्न है माणिक्य
किसी जमाने में मूल्यवान रत्न जनसामान्य के लिए उपलब्ध नहीं होते थे। विशेष तौर पर लाल अर्थात माणिक्य को तो राजा-महाराजाओं का रत्न माना जाता था। वैसे भी ज्योतिष में यह परम्परा चली आ रही है कि समाज के उच्च और शासक वर्ग की कुंडली में सूर्य लग्न से भविष्यवाणी करनी चाहिए। सूर्य स्वयं में शासक होता है। इसलिए ही इसे ग्रहों के राजा की पदवी दी गई है। जब किसी की कुंडली सूर्य बलवान हो तो उसे पिता की तरफ से स्टेबल बिजनेस मिलता है। सरकार से लाभ होता है। यदि कुंडली में दूसरे पक्ष भी बलवान हो तो ऐसा जातक विधायक, सांसद या मंत्री हो सकता है। या उसे सरकारी ठेकेदारी या सरकारी नौकरी आदि से भी लाभ होना संभव है। इसलिए जो लोग सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं उन्हें अवश्य ही माणिक्य धारण करना चाहिए।
माणक रत्न को बहुत से नामों से जाना पहचाना जाता है। प्रायः इसे माणिक्य या माणक कहा जाता है। अंग्रेजी भाषा में इसे रूबी कहा गया है। प्राचीन काल में इसे लाल कहा जाता रहा है। यह एक पूर्ण पारदर्शी रत्न है। हालांकि माणिक कठोरता के संदर्भ में हीरे की तुलना में कम कठोर होता है। लेकिन दूसरे कुछ रत्नों की तुलना में इसकी कठोरता अधिक होती है।
बहुत प्राचीन काल से ही जिन रत्नों का प्रायः उल्लेख मिलता है उसमें मोती और मूंगे के साथ माणिक भी है। भारतीय संदर्भों में देखें तो वैदिक काल में सांप के सिर पर मणि होने का उल्लेख प्राप्त होता है। माना जाता है कि यह मणि वास्तव में माणिक्य ही थी। सर्प मणि का वास्तव में क्या रहस्य था यह अभी तक क्लीयर नहीं है। दादी-नानी की कहानियों में लाल नाम की बहुमूल्य चीज का उल्लेख कई बार आता है। यह वास्तव में माणिक ही है। माणिक को ही लोक भाषा में लाल कहा जाता रहा है। कुछ प्राचीन कहानियों में कहा गया है कि जब राजा बहुत खुश हुआ तो उसने भेंट के तौर पर लाल दी थी। प्राचीन काल में जिसके पास लाल होती थी वह धनी माना जाता था। उस जमाने में भी माणिक या लाल सोने से भी अधिक कीमती होता था, जैसा कि आधुनिक युग में है।
84 प्रकार के होते हैं रत्न
वैसे तो कुल 84 प्रकार के पत्थर या रत्न होने का उल्लेख भारतीय शास्त्रों में आता है। इनमें से नौ ग्रहों के आधार पर नौ मूल्यवान पत्थरों को नवरत्न की श्रेणी में गिना जाता है। माणिक रत्न सूर्य का प्रतीक होने के कारण यह नवरत्नों की फेहरिस्त में सबसे पहले आता है। इसके बाद मोती, मंूगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमेद और वैदुर्यमणि आते हैं। ये प्रमुख नवरत्न हैं। इनमें से जो महत्व माणिक्य को प्राप्त है वह कदाचित हीरे को भी नसीब नहीं है। माना जाता है कि एक स्वच्छ माणिक्य की कीमत हीरे से भी ज्यादा हो सकती है।
माणिक्य के साथ कौन सा रत्न नहीं पहने
माणिक्य के साथ गोमेद, हीरा, लहसूनिया और नीलम रत्न को कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। लेकिन यहां यह ध्यान में रखने की बात है कि साथ में धारण करने का अर्थ है कि एक ही अंगुली में धारण किया जाना। यदि आप दूसरी अंगुली में या दूसरे हाथ की अंगुली में कोई भी रत्न धारण कर सकते हैं। वैसे ब्रेसलेट या गले में पेंडेंट के रूप में दूसरे कोई भी रत्न पहना जा सकता है।
कौन पहन सकता है
सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। इसलिए सिंह लग्न या सिंह राशि के लोगों को माणिक स्टोन जरूर पहन लेना चाहिए। इसके अलावा मेष, वृषभ, मिथुन, तुला, वृश्चिक और धनु लग्न के लोगांें को भी माणिक्य अवश्य पहन लेना चाहिए। इसके अलावा जीवन के बहुत से पहलू जो कि सूर्य से संबंधित हैं उनके लिए भी माणिक पहना जा सकता है।
माणिक्य को क्यों धारण करना चाहिए
पैतृक संपति में हिस्सेदारी मिलने को आसान बनाता है।
पिता की संपति और बिजनेस में वृद्धि होती है।
सरकारी नौकरी में मिलने की संभावना मंे वृद्धि होती है।
ब्रांड नेम और अधिक पाॅपुलर होता है।
नेतृत्व शक्ति में वृद्धि होती है।
समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
प्रसिद्ध मिलती है।
पित्त संबंधी रोगों के अलावा आंखों और हृदय रोगों से भी माणिक्य धारण करने से लाभ होता है।
आत्मविश्वास में तेजी से बढ़ता है।
सरकार के खजाने में हिस्सेदारी मिलती है।
बड़े और प्रभावशाली लोगों, विशेष तौर पर राजनीति से जुड़े लोगों से संपर्कों में वृद्धि होती है।
यदि आप कोई बड़ा बिजनेस या कंपनी चलाते हैं तो जल्दी और स्थायी ग्रोथ होती है।
अच्छे माणिक्य की क्या पहचान होती है
एक अच्छा माणिक हमेशा समान रूप से लाल होता है। और अधिकम पारदर्शी होता है। लालिमायुकत विशेष आभायुक्त माणिक का सर्वश्रेष्ठ होने की पहचान है। एक अच्छे माणिक्य को न केवल दीप्तिमान और पारदर्शी होना चाहिए बल्कि उसे छूने पर सवर्दा अंगुलियों पर लालिमा नजर आनी चाहिए।
कैसा माणिक्य आपके लिए शुभ है
लगभग 3 से 5 कैरेट का माणिक रत्न आमतौर पर पर्याप्त होता है। यदि आपके पास बजट है तो आप इससे अधिक वजन का माणिक्य भी ले सकते हैं। लेकिन आमतौर पर इतने वजन का माणिक्य अपना पूरा फल दे सकता है। स्टोन, सूर्य के 11000 मंत्रों से अभिमंत्रित करवा कर, तांबा धातु मंे, रविवार को किसी शुभ मुहूर्त में, अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिए। सूर्य रत्न माणिक्य को गले में भी पहना जा सकता है। - लगभग 3 से 5 कैरेट का माणिक स्टोन, सूर्य के 11000 मंत्रों से अभिमंत्रित करवा कर, तांबा धातु मंे, रविवार को किसी शुभ मुहूर्त में, अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिए। माणिक्य के उपरत्नों में माणक का पोटा और तामड़ा आता है। यदि रत्न नहीं पहन सकते हैं तो ढ़ाई रिंग वाली तांबे की अंगूठी अनामिका में धारण करने से भी लाभ होता है।
माणिक्य कैसे, कब और किस धातु में धारण करें
माणिक्य को हमेशा तांबे या सोने में धारण करना चाहिए।
अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिए