मीन लग्न या राशि के लिए शुभाशुभ रत्न कौन से हैं?
यह पूर्ण जलीय राशि है। देव गुरू बृहस्पति इस राशि के स्वामी है। यह एक पूर्ण जलीय राशि होने से इस राशि या लग्न के स्वामी प्राकृतिक वातावरण में रहना पसंद करते हैं। इस राशि के लोग भावुक और कल्पना लोक में विचरण करने वाले होते हैं। मीन राशि या लग्न के लोगों की धर्म पर विशेष आस्था होती है।
मीन लग्न से संबंधित बिजनेस या सर्विस
अध्यापन, सलाह देना, छोटी-छोटी रकम ब्याज पर देना, खाने की ठोस वस्तुओं का व्यापार आदि से मीन लग्न वालों को लाभ होने की संभावना अधिक होगी। हालांकि आजीविका के ठीक निर्णय के लिए लग्न, नवम और दशम भाव को देखना बहुत जरूरी है।
मीन लग्न या राशि वालों के जीवन के अंतिम वर्ष बहुत अच्छे नहीं व्यतीत होते हैं।
मीन लग्न का स्वामी बृहस्पति है, जो कि शुभ ग्रह है। जहां तक रत्न धारण करने की बात है तो मीन लग्न में केवल पुखराज और मोती ही ऐसे दो रत्न हैं जिनको आप बिना किसी की सलाह के भी धारण कर सकते हैं।
पुखराज को कैसे और कब धारण करें
पुखराज को सोने में, गुरूवार को प्रातः किसी ब्राह्मण के हाथों से धारण करना चाहिए। पुखराज की अंगूठी को धारण करने से पूर्व बृहस्पति के बीज मंत्रों से अभिमंत्रित करवाना चाहिए।
कब और कैसे धारण करें
मोती को सबसे छोटी अंगुली में पूर्णिमा से सात दिन पहले या सात दिन बाद में आने वाले किसी सोमवार को रात्रि के समय चांदी में धारण करना चाहिए। मोती की प्राण प्रतिष्ठा के लिए चंद्रमा के 11000 मंत्रों के जाप से अभिमंत्रित करना चाहिए और एक रात्रि के लिए मोती की अंगूठी को चावलों में रखना चाहिए।
इसके अलावा यदि कोई और रत्न आपको धारण करना है और आपका मीन लग्न है तो कुंडली के अवलोकन के उपरान्त ही करना चाहिए।
-- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़।
विदुर जी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।



