यदि टाॅयलेट गलत जगह बन जाए तो क्या करें

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यदि टाॅयलेट गलत जगह बन जाए तो क्या करें

 टायलेट यदि वास्तु के विपरीत बना हुआ हो तो उसके दूरगामी प्रभाव देखे जाते हैं। आमतौर पर मैं देखता हूं जिन घरों में, औद्योगिक क्षेत्र या ऑफिसेज में भी यदि टॉयलेट बिल्कुल वास्तु पुरुष के सिर पर बना हुआ हो, तो निश्चित तौर पर यह जीवन में उन्नति को ब्लॉक करता है। आॅफिस और घरों के अलावा कुछ स्कूलों और फैक्टियांे में भी मैंने देखा है कि जब कम्पास के आधार पर टाॅयलेट जब वास्तु पुरूष के चेहरे पर आ जाता है तो निश्चित रूप से परिसर बंद हो जाता है। बिजनेस में नुकसान होता है। बहुत से इस तरह की समस्याएं भी आती हैं जिनके बारे में सोचा तक नहीं गया हो। आप उन्हें आकस्मिक विपत्ति भी कह सकते हैं। इस दोष के कारण व्यक्ति अपने जीवन में इतने अधिक गलत फैसले लेता है कि सभी मित्रों और परिचितों को भी आश्चर्य होता है, कि यह सब क्या हो रहा है। आपकी छवि मानसिक तौर पर समाज में बहुत उज्ज्वल दिखाई देती है इसके बावजूद आपके फैसले गलत होते हैं। और गलत भी इतने कि आप इन फैसलों को आत्मघाती भी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जब टाॅयलेट गलत जगह हो तो परिणाम बहुत विध्वंसकारी सिद्ध होते हैं। और घर मालिक धीरे-धीरे कर्ज की स्थिति में जा सकता है या उसके यहां जो संतान है वह विकलांग हो सकती है। लेकिन यह पोजिशन तब बनती है जब कि टाॅयलेट ईशान कोण में अर्थात् वास्तुपुरूष के सिर पर बना दिया गया हो। 
      यहां एक बात मैं स्पष्ट कर दूं कि जहां-जहां मैं टॉयलेट शब्द को लिख रहा हूं, उसका अर्थ लेट्रिन या पखाना से है, बाथरूम से नहीं है। यदि ईशान कोण में बाथरूम बना हुआ हो तो उसका कोई बुरा प्रभाव देखने में नहीं आएगा। यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि यदि ईशान कोण में बाथरूम बना हुआ है तो उसे आप कभी भी यूरिनल के रूप में काम में मत लें।
     दूसरी बात यह भी है कि वास्तु पुरुष के सिर पर ही टायलेट बना हुआ है, इसका निर्णय आपको हमेशा कंपास के द्वारा ही करना चाहिए। केवल सूर्य की दिशा को पूर्व मानते हुए कुछ सज्जन टॉयलेट की दिशा तय कर देते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। कंपास को आधार मानकर ही निश्चित करें कि यहां बिल्कुल ठीक वास्तु पुरुष का मस्तिष्क है। 
        जब यह सुनिश्चित हो जाए कि टॉयलेट वास्तु पुरुष के सिर पर ही बना हुआ है, तो हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम उसे हटा दें। लेकिन आज की भौतिक परिस्थितियों में कुछ प्रिय मित्र ऐसा कर सकने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। मेरे पास इस संबंध में बहुत से विचारणीय प्रश्न आते हैं, कुछ सम्मानित सज्जन शंका व्यक्त करते हैं कि जब घर में कंपास के आधार पर टॉयलेट वास्तु पुरुष के सिर पर आ रहा है तो क्या उसका कोई वैकल्पिक उपाय भी है। लेकिन मैं यहां यह स्पष्ट कर दूं कि इस वास्तु दोष के बहुत ज्यादा सटीक वैकल्पिक उपाय नहीं है। जहां तक संभव हो इस टाॅयलेट को यहां से हटा दें। यदि आप की ग्रह दशा बहुत अच्छी चल रही है तो आपको इसका असर दिखने में समय लग सकता है। हालांकि इसके बावजूद भी मैं तो आपको यही सलाह दूंगा कि आप उसको हटा दें। क्योंकि जैसे ही आप की दशा चेंज होगी आपको आश्चर्यजनक रूप से उसके नुकसान होने लगेंगे।
      मैंने अनुभव किया है कि जब ईशान कोण में बना हुआ टॉयलेट अपने अशुभ फल देना शुरू कर दे तो फिर उसे रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस लिए मैं फिर कहूंगा कि यदि आप की स्थिति ठीक है और आपका टॉयलेट वास्तु पुरुष के सिर पर यानि ईशान कोण में या अग्नि कोण में बना हुआ है तो उसे समय रहते आप परिवर्तित कर लें।
यदि हटा नहीं सकते हैं तो क्या करें - 
          -टायलेट के दरवाजे पर डोर क्लोजर लगाएं, जिससे दरवाजा स्वतः ही बंद होता रहे।
         - टायलेट के दरवाजे पर मोटे कपड़े का परदा रखें।
        - समुन्द्री नमक को कपड़े में बांधकर रखें, या कटोरी में रख सकते हैं। महीने में दो-तीन बार नमक को बदलते रहें। 
        - पीले रंग की ऑयल पेंट की 2 इंच चैड़ी पट्टी टॉयलेट के चारों तरफ खींचें। यदि टॉयलेट के चारों तरफ पट्टी लगा देना संभव नहीं हो तो टॉयलेट के अंदर की तरफ उसको लगाना चाहिए। इस स्थिति में आप स्टील का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वह परमानेंट उपाय है।
       - यदि आप किसी किराये के घर में हैं और इस घर में दूसरी जगह भी टायलेट बना हुआ है तो आप ईशान कोण में बने टायलेट का उपयोग नहीं करें। या कोई रूम है जिसमें अटैच टॉयलेट है और वह ईशान कोण में नहीं है तो आप उसका उपयोग कर सकते हैं और ईशान कोण में बने टायलेट पर ताला लगा कर बंद कर दें। या उसका उपयोग केवल नहाने के लिए ही करें।

- ज्योतिर्विद् सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।

Satyanarayan Jangid

Satyanarayan Jangid explains astrology, numerology, and spiritual practices in a way that’s simple, clear, and easy to relate to. He focuses on the why behind rituals instead of blind belief, helping people understand how these ideas actually fit into real life. His teaching feels calm and grounded—less about fear, more about clarity—so things don’t feel heavy or confusing, just practical and reassuring.

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