भूदान है मंगल का सबसे असरदार उपाय
ज्योतिष में मंगल को भूमि पुत्र कहा जाता है। मंगल मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। यह कर्क राशि में नीचगत और मकर में उच्चस्थ होता है। भावों के आधार पर मंगल को दशम भाव में दिग्बली माना जाता है। दशम भाव में बली मंगल कुलदीपक नामक प्रसिद्ध योग का निर्माण करता है।
फलित ज्योतिष में मंगल की प्रसन्नता के लिए बहुत से उपायों के बारे में उल्लेख आता है। इनमें ब्लड डोनेट करना, लाल फल और मिठाई का दान करना, भूदान और अस्त्रों का दान करना जैसे उपाय प्रायः बताये जाते हैं। इसके अलावा मंगल के बीज मंत्रों के जाप भी मंगल की प्रसन्नता और शान्ति के लिए रामबाण माने जाते हैं।
महाभारत की कथा
महाभारत के समय की बात है। पांडव जुए में हार जाने के बाद अपना वनवास काटने के लिए वन-दर-वन चल रहे थे। काफी चलने के उपरान्त वे वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे कि उन्हें जल की आवश्यकता अनुभव हुई। दूर एक सरोवर था। सबसे पहले सबसे छोटे भाई सहदेव को पानी लाने के लिए भेजा गया। जब सहदेव सरोवर का पानी पीने लगा तो अचानक आकाशवाणी हुई कि इस सरोवर का पानी पीने से पहले मुझे कुछ सवालों के जवाब दे, उसके उपरान्त ही पानी पिये। अन्यथा पानी पीते ही मृत्यु हो जायेगी। लेकिन सहदेव ने इस चेतावनी पर कोई ध्यान नहीं दिया। और पानी पी लिया। परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई। इस प्रकार से प्रश्न का उत्तर नहीं देने के कारण बारी-बारी से चार पांडव मृत्यु को प्राप्त हो चुके तो युधिष्ठिर वहां पहुंचे और उन्होंने यक्ष के प्रश्नों के उत्तर दिए।
मरणासन्न व्यक्ति का मित्र कौन है
हालांकि यक्ष ने बहुत से प्रश्न पूछे थे, जिनके समुचित उत्तर ज्येष्ठ पांडु पुत्र युधिष्ठर ने दिये। इन प्रश्नों में एक प्रश्न आज भी वर्ततान युग में प्रासांगिक है। यक्ष ने प्रश्न किया कि- ‘‘मरणासन्न व्यक्ति का मित्र कौन है?’’ युधिष्ठिर ने उत्तर दिया- ‘‘मरणासन्न व्यक्ति का मित्र दान है।’’ इसका अर्थ है कि केवल दान ही किसी व्यक्ति के मृत्यु के उपरान्त उसके साथ जा सकता है, शेष सभी चीजें क्षणभंगुर है। या दूसरी सभी चीजें यहीं रह जाती है।
जो लोग संपन्न हैं उन्हें मैं अक्सर भूदान करने की सलाह देता हूं। हालांकि ज्यादातर लोग ऐसा करते नहीं है। कारण यह नहीं है कि वह भूमि दान करने में सक्षम नहीं है बल्कि कारण यह है कि वे लोग भूदान के महत्व को समझते नहीं है। जो व्यक्ति सक्षम होकर भूदान नहीं करता है उसका अगले जन्म में मंगल खराब हो जाता है। और जो व्यक्ति भूमि दान करता है अगले जन्म में बड़ा जमींदार और भूमिपति बनता है।
ज्योतिष में जब जन्म कुंडली में मंगल दोष हो और उसके कारण सगाई-विवाह में देरी हो रही हो या फिर वैवाहिक जीवन में कलह का वातावरण बन रहा हो, इस स्थिति से निजात पाने के लिए मंगल के उपाय करना बहुत लाभदायक होता है।
क्या होते हैं मंगल के उपाय
आमतौर पर मंगल के उपायों में लाल फूलांे, फलों और लाल रंग की मिठाई से मंगल की पूजा करना, मंगल के बीज मंत्रों का निश्चित समय और संख्या में जाप करना, मंगलवार को प्रातः 11 बजे से पहले-पहले ब्लड डोनेट करना, मंगल से संबंधित खाद्य पदार्थों का दान करना और सबसे मंहगा और प्रभावी उपाय है भूमि का दान करना। यहां यह ध्यान में रखने वाली बात है कि भूदान करना न केवल मंगल के दुष्प्रभवों को नष्ट करता है बल्कि यह मंगल के शुभ प्रभावों में भी वृद्धि करता है। ऐसा व्यक्ति जो कि भूमि का दान करता है वह अपने कई जन्मों तक भूमिपति होता है।
- ज्योतिर्विद् सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।