यदि बिजनेस नहीं चल रहा तो यह करें उपाय।
केवल 43 दिनों में गणेशजी की कृपा प्राप्त करें
पहली बात तो यह है कि बिजनेस नहीं चलने के कई कारण होते हैं। सबसे पहला कारण तो हमें प्रैक्टिकली तौर पर देखना होगा कि वास्तव में बिज़नस क्यों नहीं चल रहा है। व्यावहारिक तौर पर बिजनेस के लिए बहुत सी जरूरी बातें होती हैं। जैसे पर्याप्त पूंजी, लोकेशन आदि। इसलिए पहले यह तय करें कि बिजनेस के लिए सभी जरूरी चीजें और सुविधाएं हमारे पास उपलब्ध हैं। इन सब के बावजूद भी बिजनेस नहीं चल रहा है, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आपका भाग्य साथ नहीं दे रहा है। इस समस्या के निवारण का एक अचूक उपाय मैं यहां बता रहा हूं। यदि पूरे मनोयोग से इस उपाय को किया जाए तो निश्चित तौर पर बिजनेस चलने लगता है। इसमें कोई शंका नहीं है।
भगवान श्रीगणेश है ऋद्धि और सिद्धि के दाता
जैसा कि सर्वविदित है कि भगवान श्रीगणेशजी ऋद्धि और सिद्धि के दाता हैं। जब इनकी कृपा होती है तो आसमान से स्वर्ण की वर्षा होती है। श्रीगणेश जी महाराज ऋण और संकटों को शीघ्र नष्ट करने वाले देव हैं। इनकी पूजा में आपको कोई विशेष मंत्रोचार और विधियों की आवश्यकता नहीं है। केवल शरीर और मन को शुद्ध करके इनका ध्यान किया जाना ही पर्याप्त है। मात्र लड्डू का भोग लगाकर दूर्वा अर्पित करने भर से ही श्रीगणेशजी महाराज प्रसन्न हो जाते हैं।
यहां मैं जो आपको चमत्कारी प्रयोग बता रहा हूं वह अनुभवजनित है और बहुत से लोगों को मैंने बताया है। कम या ज्यादा सभी को लाभ हुआ है। इसलिए आप भी अपने किसी संकट के निवारण के लिए यह प्रयोग कर सकते हैं।
क्या करना चाहिए
किसी भी शुक्ल पक्ष के बुधवार से शुरू करें। और कुल 43 दिनों तक लगातार करें। हालांकि उपाय 43 दिनों तक अनवरत करना है, लेकिन इसके परिणाम 7 से 15 दिनों के अंदर ही मिलने आरंभ हो जाते हैं।
दुकान, फैक्टरी, घर, कार्यालय या किसी भी कार्यस्थल पर उत्तर दिशा में पश्चिम या पूर्व मुखी गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। प्रतिदिन दो या चार की संख्या में लड्डू (बेसन की बूंदी) के बने हुए, श्री गणेशजी को समर्पित करें।
सम्मानित पाठक जानते हैं कि मैं बेकार के टोटकों को महत्व नहीं देता हूं, और ना ही बिना लॉजिक के तथाकथित टोटकों पर मेरा विश्वास है। टोटकों को करने की मैंने कभी सलाह भी नहीं दी है। मैंने जो कुछ भी बताया है, वह कोई टोटका नहीं है। बल्कि यह 43 दिनों का, श्रीगणेशजी का एक अनुष्ठान है। यहां श्रीगणेशजी, रिद्धि सिद्धि और सफलता के दाता हैं, बूंदी के लड्डू बृहस्पति के प्रतीक हैं, बूंदी में चीनी की चाशनी चंद्रमा है। और ठोस चीनी, शुक्र का प्रतिनिधित्व करती है। इस तरह से बृहस्पति, चंद्रमा और शुक्र सर्वाधिक शुभ ग्रहों का श्री गणेश जी के साथ सार्थक समन्वय स्थापित होता है, जो हमारी बंद किस्मत के लॉक को अनलॉक करके एक मूमेन्ट पैदा करता है।
हालांकि जिनके ग्रह बहुत ज्यादा खोटे हैं, उनको परिणाम मिलने में वक्त लग सकता है, लेकिन परिणाम निश्चित मिलेगा, इसमें कोई शंका नहीं है।
- ज्योतिर्विद् सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।