हीलिंग पाॅवर से समस्या समाधान

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हीलिंग पाॅवर से समस्या समाधान
हीलिंग पाॅवर से समस्या समाधान
बेतहाशा वैज्ञानिक शोधों और संसाधनों के उपरान्त भी वैज्ञानिक अभी तक यह पता नहीं लगा पाएं है कि वास्तव में ब्रह्माण्ड का व्यास या आकार क्या है। ताजा आकड़ों के अनुसार ब्रह्माण्ड का व्यास लगभग 91 अरब प्रकाश वर्ष माना गया है। लेकिन ब्रह्माण्ड कोई निश्चित माप अभी तक पता नहीं लगा है और इसे अज्ञात मानते हुए वैज्ञानिक समझते हैं कि यह अनन्त हो सकता है। इसके अलावा यह भी एक रहस्य है  कि वास्तव में ब्रह्माण्ड क्या है। ब्रह्माण्ड की मान्य परिभाषा है कि सम्पूर्ण अंतरिक्ष और उसकी अन्तर्वस्तु को ब्रह्माण्ड कहते हैं। इस ब्रह्माण्ड में सभी तारे, ग्रह, गैलेक्सियां, अपरमाणविक कण और सभी तरह की ऊर्जाएं शामिल हैं। इन ऊर्जाओं के कारण ब्रह्माण्ड असीम शक्तियों को भी स्रोत है। 
इस संसार में बहुत सी शक्तियां हैं जिनके बारे में सामान्यतयाः लोग परिचित नहीं है। क्योंकि ये सब पराविज्ञान की श्रेणी में आती हैं। हालांकि ये सब वैज्ञानिक तर्क से परे हैं क्यांेकि विज्ञान की कसौटी पर इनको सिद्ध करना बहुत आसान नहीं है। इसके भी कई कारण हैं। जो सबसे बड़ी वजह वह यह कि जब हम इनके बारे में किसी को बताते हैं तो यह जरूरी नहीं कि वह इन विद्याओं के मर्म को समझने की क्षमता रखता हो। क्योंकि तर्क करना एक अलग बात और किसी विषय को समझना अलग बात है। इसलिए इन विद्याओं को पराविज्ञान की श्रेणी में रखा जाना मुझे ज्यादा ठीक लगता है। ये सब विश्वास की बातें हैं। इनको तर्क पर नहीं कसना चाहिए। हालांकि मैं जिस ऊर्जा की बात करूंगा वह पूरी तरह से वैज्ञानिक तर्कों पर खरी उतर चुकी है, तब भी मैं उसे पराविज्ञान की फेहरिस्त में रखना पसन्द करता हूं। क्योंकि मैंने जो अनुभव किया है उसके आधार पर उसको प्राप्त करने में किसी देवता को माध्यम बनाना आवश्यक है। यद्यपि यहां मैं पाठकों को किसी भ्रान्ति में न रखते हुए स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि इस ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य करने वाले ज्यादातर लोग इसको किसी देव या देवी से जोड़ कर नहीं देखते हैं। उनके आधार पर तो यह पूरी तरह से ब्रह्माण्डीय ऊर्जा है। जिसे वैज्ञानिक तरीकों से ही प्राप्त करना और पास-आउट करना होता है। लेकिन मेरा दृष्टिकोण इससे कुछ पृथक है। मैं इसको अपने इष्ट से जोड़ कर देखता हूं। और मैंने जो अनुभव किया है उसके आधार पर कह सकता हूं कि मुझे इसके अच्छे परिणाम ही मिले हैं।  
हीलिंग पाॅवर क्या है
ब्रह्माण्ड ऊर्जाओं का भण्डार है। कुछ ऊर्जाएं जैसे प्रकाश, ताप और हवा आदि से हम परिचित हैं। यदि आप पढ़े-लिखे हैं तो जानते होंगे कि कुछ हजार वर्षों पूर्व पृथ्वी की समस्त मानव जाति सूर्य और चन्द्रमा जैसी दिखाई देने वाली ऊर्जाओं की ही पूजा किया करती थी। यह स्वभाविक भी था। क्योंकि इन दोनों पिण्डों की ऊर्जाओं को तब की मानव जाति प्रत्यक्ष देख और अनुभव कर सकती थी। समय के साथ मानव मस्तिष्क का विकास हुआ। लोगों ने इनके अलावा भी और बहुत सी ब्रह्माण्डीय ऊर्जाओं की पहचान की। ऐसी ही एक ऊर्जा का नाम हीलिंग पाॅवर है। इसे प्राण ऊर्जा भी कहा जाता है। यह ब्रह्माण्ड की एक अद्भुत अदृश्य ऊर्जा है। इस ऊर्जा को साधने वाला साधक अपने शरीर में संग्रहित कर सकता है। एक उदाहरण से यह बात आप को आसानी से समझ में आ जायेगीं आज हम जिन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं वे सब इन ऊर्जाओं के ही भण्डार हैं। कई बार आपने देखा होगा कि हम अपने इष्ट से किसी कार्य विशेष के लिए प्रार्थना करते हैं और तत्काल ही वह कार्य सम्पन्न हो जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि यह सब कैसे होता है। दरअसल यह इसलिए होता है क्योंकि हमारे इष्ट देव अपनी संग्रहित ऊर्जा में से कुछ ऊर्जा हमें पास-आउट करते हैं। चूंकि हम इन ऊर्जाओं से परिचित नहीं होते हैं, अतः स्वभाविक तौर पर किसी स्रोत के बारे में जानकारी भी नहीं होगी। हमारी इच्छा पूर्ति हो गई, हम उसी में खुश हो जाते हैं। हम यह नहीं सोचते कि हमारा यह कार्य कैसे हुआ। 
यह सर्वदा सत्य है कि हीलिंग पाॅवर को प्राप्त करके दूसरों को पास-आउट करने की क्षमता सभी में समान रूप से होती है। वैसे तो ब्रहमाण्ड की इस ऊर्जा को प्राप्त करना बहुत अधिक कठिन नहीं है। कोई भी साधारण व्यक्ति इसे प्राप्त कर सकता है। लेकिन आधुनिक जीवन शैली के कारण हम इसके नियमों का पालन कर पाने में सफल नहीं होते हैं। वर्तमान में हमारे जीने के आचार-विचार और रहन-सहन पूरी तरह से शुद्ध नहीं है। इसलिए सामान्य तौर पर इस ऊर्जा को किसी दूसरे से प्राप्त करना अधिक बेहतर और आसान उपाय है। हीलिंग पाॅवर को प्राप्त करने के लिए हमें किसी भी दैवीय शक्ति से जुड़ना जरूरी है। यह इसलिए है क्योंकि हमारा मन हमेशा भटकता रहता है। विद्वानों ने कहा है कि मन की गति अपार है। वैसे भी हम देख ही रहे हैं कि मन कुछ ही पलों में कहां से कहां पहुंच जाता है। यह भी तय है कि जब तक मन को एकाग्र नहीं करेंगे तब तक किसी भी कार्य में सफलता की संभावना नहीं होगी। एकाग्रता बहुत आवश्यक है। क्योंकि मन की दो अवस्थताएं हंै। एक चेतन मन और दूसरा अवचेतन मन। चेतन मन वह है जिसके द्वारा हम विचार करते हैं, सोचते हैं आदि। जब कि अवचेतन मन ब्रह्माण्ड की ऊर्जाओं को जोड़ने और इन ऊर्जाओं को शरीर में समाहित करने में हमें सहयोग देता है। अवचेतन मन जब जक हम जीवित रहते हैं हमेशा सक्रिय बना रहता है। यहां तक जब हम शयन की अवस्था में होते हैं तब भी हमारा अवचेतन मन जागृत अवस्था में ही रहता है। इसलिए ही हमें सपने आते हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों में अवचेतन मन की जागृत अवस्था के बारे में परिचित नहीं होते हैं। जब कि हीलिंग पाॅवर को प्राप्त करने के लिए इस अवचेतन मन को ही माध्यम बनाना पड़ता है। 
हीलिंग को सरलता से समझना तो कठिन है। जब तक हम इसकी गहराई और गम्भीरता को ना भांप लें तब तक इसकी वास्तविक शक्ति से हमेशा अपरिचित ही रहेंगे। यहां यह भी महत्त्वपूर्ण है कि यदि हम हीलिंग से लोगांे का भला करना चाहते हैं तो हमें अवश्य ही हीलिंग को समझ लेना चाहिए। दूसरा पक्ष यह है कि यदि हमारा उद्देश्य स्वयं का उपचार या समस्या समाधान है, तो मैं कहूंगा कि ऐसा करना कदाचित लाभदायक नहीं है। क्योंकि हीलिंग पाॅवर को हम अपने शरीर में तभी ग्रहण कर पायंेगे जब कि हम पूरी गहराई से सुपरिचित हों। इसलिए शुरूआत में किसी हीलिंग विशेषज्ञ की सेवाएं लेने में कोई हर्ज नहीं है।
ऊर्जा पासआउट कौन कर सकता है
साधारण भाषा में कहा जाए तो ऐसा कोई भी व्यक्ति इस ऊर्जा को दूसरों के हितों के लिए पास-आउट कर सकता है, जिसके पास इस ऊर्जा का संग्रह हो। जैसे हमारे देवी-देवता, जिनके पास अक्षय ऊर्जा संचय है या प्रत्यक्ष रूप से हमारा सांसारिक गुरु भी यह कार्य कर सकता है। आपने देखा होगा या सुना होगा कि किसी गुरु, बाबा या नाथ ने अपने किसी शिष्य को ऐसा आशीर्वाद दिया कि वह कुछ ही वर्षों में दरिद्र से बहुत धनवान बन गया। ऐसे बहुत से उदाहरण आपको मिल सकते हैं। यह सब क्या है। वास्तव में ऐसे गुरुओं के पास संग्रहित ऊर्जा का विशाल भण्डार होता है। जिसमें से वे कुछ ऊर्जा एक क्षण में ही अपने समक्ष व्यक्ति को पास-आउट कर देते हैं। श्री रामकृष्ण परमहंस ने अपने शिष्य विवेकानन्द को कुछ ही पलों में इतनी ऊर्जा पास-आउट कर दी कि विवेकानन्द समूचे विश्व में प्रख्यात हो गये। 
अब बात आती है इस ऊर्जा को वर्तमान में कौन पास-आउट कर सकता है। तो इसका उत्तर है कि जिसने इसे संग्रह किया है वही इसे पास-आउट भी कर सकता है। यह कोई बहुत कठिन काम नहीं है। इसका सीधा सा नियम है कि आपने 15 मिनिट की ऊर्जा का संग्रह कर लिया है तो आप इसे तीन भागों में बांट कर 5-5 मिनिट की ऊर्जा तीन लोगों में विभाजित कर सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब कि आपने जिस इष्ट की मार्फत यह ऊर्जा प्राप्त की है उसकी स्वीकृति आपको प्राप्त हो। अर्थात् मेरा आशय है कि आप अपनी मर्जी के किसी व्यक्ति को ऊर्जा पास-आउट नहीं कर सकते हैं। यदि आप ऐसा करने की कोशिश करेंगे तो उसका कोई लाभ नहीं होगा। और यह ऊर्जा आप से निकल कर ब्रह्माण्ड में पुनः स्थापित हो जायेगी। स्वीकृति के कुछ सूत्र होेते हैं जिनसे ऊर्जा को पास-आउट करने वाला आसानी से पता लगा सकता है कि किस व्यक्ति को ऊर्जा देनी है और किसे नहीं देनी है। 
ब्रह्माण्डीय ऊर्जा के लाभ 
किसी भी विद्या की सार्थकता तभी है जब कि उसका सदुपयोग हो सके। इसलिए इसमें मानव कल्याण सर्वोपरि रहना चाहिए। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से इस संसार में जो कुछ भी हो सकता हो वह सब किया जा सकता है। लेकिन यह हीलिंग पास-आउट करने वाला और उसको ग्रहण करने वाले पर निर्भर करता है। हीलिंग पाॅवर से समस्या पर बहुत हद तक न केवल नियन्त्रित किया जा सकता है बल्कि कुछ सामान्य समस्याओं से हम पूरी तरह से मुक्त भी हो सकते हैं। आमतौर पर साधारण रूप में दैनिक जीवन की सभी समस्याओं का समाधान हीलिंग से सम्भव है। हीलिंग पावर दो तरह से काम करता है। पहला तो वह हमारा आत्मविश्वास बढ़ाता है। दूसरा वह समस्या के मूल को कचोटता है। जिससे दो चार हीलिंग से समस्या से पूरी तरह से निजात मिल पाना सम्भव हो जाता है। समस्या जीवन के किसी भी क्षेत्र से सम्बन्धित हो सकती है। धन, सफलता, स्वास्थ्य, वैचारिक-मतभेद आदि कुछ भी हो सकता है। अर्थात् सभी तरह के मामलों में हीलिंग पाॅवर से हम लाभ उठा सकते हैं। 

Satyanarayan Jangid

Satyanarayan Jangid explains astrology, numerology, and spiritual practices in a way that’s simple, clear, and easy to relate to. He focuses on the why behind rituals instead of blind belief, helping people understand how these ideas actually fit into real life. His teaching feels calm and grounded—less about fear, more about clarity—so things don’t feel heavy or confusing, just practical and reassuring.

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