क्या सूर्य रेखा देती है जीवन में सफलता?
क्या कहती है आपकी सूर्य रेखा
वैदिक ज्योतिष हम भारतीयों के जीवन में बसा हुआ है। हमारे सभी दैनिक कार्य ज्योतिष के अनुसार तय होते हैं। जन्म से लेकर दूसरे सभी संस्कार ज्योतिष की गणना पर ही आधारित हैं। ज्योतिष हजारों वर्ष प्राचीन विद्या है। रामायण और महाभारत में भी अच्छे ज्योतिषियों का उल्लेख मिलता हैं माना जाता है कि रामायण लगभग 7000 वर्ष प्राचीन घटनाक्रम है और महाभारत करीब 5000 वर्ष प्राचीन है और वैदिक ज्योतिष इससे भी प्राचीन सिद्ध होता है। ऐसा लगता है जैसे मानव के विकास क्रम में भविष्य के प्रति आशंका ने भविष्य पर नजर रखने के शास्त्रों का भी विकास होता रहा। संभव है कि हस्तरेखाएं भविष्य देखने का सबसे प्राचीन तरीका हो। मानव को हाथों की रेखाओं ने हमेशा आश्चर्यचकित किया है। क्या यह कम आश्चर्य की बात है कि वर्तमान में 8 अरब के करीब मनुष्य इस पृथ्वी पर है और असंख्य यहां से मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। जब कि किसी की भी हाथों की रेखाएं परस्पर मिलती नहीं है। जहां तक मेरा सोचना है कि तकदीर देखने की विद्याओं की शुरुआत हस्त रेखाओं के माध्यम से ही शुरू हुई होगी। फलित ज्योतिष जैसी चीजें शायद बाद में अस्तित्व में आ सकती हैं।
सूर्य रेखा को सर्वोच्च महत्व क्यों प्राप्त है
किसी भी हथेली में कुछ प्रमुख रेखाओं के अतिरिक्त सूक्ष्म या कम प्रधान रेखाएं भी होती हैं। जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा, स्वास्थ्य रेखा, भाग्य रेखा और सूर्य रेखा प्रधान रेखाओं में आती हैं। इसके अलावा विवाह रेखा और मंगल रेखा जैसी बहुत सी रेखाएं कम महत्व की रेखाओं में शुमार होती है। यदि आप किसी जातक की जीवन शैली के बारे में बात करें तो सूर्य रेखा सबसे महत्वपूर्ण रेखा होती है। क्योंकि सूर्य को आत्मकारक ग्रह माना जाता है। किसी जमाने में जब राजा-महाराजाओं का दौर था, तब विशिष्ट जनों की सूर्य लग्न कुंडली ही देखी जाती थी। उनके लिए उदय लग्न कुंडली का महत्व सूर्य कुंडली से कमतर था। वर्तमान में भी जब किसी की प्रसिद्धि, राजनीतिक सफलता, पावर, अतुलनीय धन-वैभव देखना हो जन्म कुंडली में सूर्य का ही आकलन किया जाता है। इसी प्रकार से हाथों में भी सूर्य रेखा का अपना महत्व है।
हथेली में सूर्य रेखा का आरम्भ अनामिका अंगुली के नीचे से होता और यह मणिबंध की तरफ बढ़ती है। आप इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं कि हाथों में अनामिका अंगुली के नीचे जो रेखा होती है उसे सूर्य रेखा कहा जाता है। सूर्य रेखा वास्तव में जीवन में सफलता की रेखा है। कुछ लोग इसे सरकारी नौकरी से जोड़ते हैं लेकिन अच्छी सूर्य रेखा भी सरकारी नौकरी की गारंटी नहीं है। लेकिन अच्छी सूर्य रेखा जीवन को सुखद और समृद्ध जरूर बनाती है। सूर्य रेखा के
निम्न तथ्यों से देखें सूर्य रेखा की शुभाशुभ स्थितिः-
- सूर्य रेखा वह अच्छी होती है जो प्रधान रेखाओं की तरह ही स्पष्ट हो।
- अन्य रेखाओं की तुलना में पतली सूर्य रेखा किसी काम की नहीं होगी।
- टूटी हुई बिखरी हुई सूर्य रेखा भी खराब है।
- दबे हुए सूर्य पर्वत की सूर्य रेखा बहुत अच्छा फल नहीं देगी।
- सूर्य रेखा जब बीच में से टूट जाए तो व्यापार बन्द हो जाता है।
- सूर्य रेखा का शाखाओं में विभक्त होना अच्छा संकेत है लेकिन रेखाएं कहां जा कर खत्म होती हैं उसके आधार पर फलित कहना चाहिए।
- सूर्य रेखा का पूरा फल तभी मिल पाता है जब कि हथेली में दूसरी रेखाएं भी बलवान हो।
- यदि सूर्य के क्षेत्र या सूर्य की रेखा पर काला तिल हो तो समाज में बदनामी होती है।
- कमजोर और टूटी हुई लम्बी सूर्य रेखा की तुलना में छोटी सूर्य रेखा अधिक प्रभावी होती हैं
- सूर्य रेखा पर द्वीप होना बिजनेस में नुक्सान देता है।
- जब राहु के क्षेत्र तक सूर्य रेखा जाए तो वह राजनीति में बड़ी सफलता का संकेत है।
- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।
विशेष सूचना - (डिस्क्लेमर या अस्वीकरण) यहां दी गई जानकारी प्रचलित मान्यताओं, पंचांग और दूसरे धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। उपरोक्त तथ्यों को केवल जानकारी देने के लिए लिखा गया है। वास्तविकता इससे अलग हो सकती है। गाइडगुरु.काॅम इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।