कब है तेजा दशमी
जाने श्री तेजा जी महाराज की कथा
वीर तेजा जी महाराज राजस्थान के एक महान समाज सुधारक, गो रक्षक और योद्धा थे। तेजा जी महाराज की एक लोक देवता के रूप में समस्त राजस्थान में पूजा की जाती है। लोक मान्यता के अनुसार इनको शिव का अवतार माना जाता है। राजस्थान के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में भी की जाती है।
श्री तेजा जी का जन्म श्री माघ शुक्ल की चतुर्दशी को विक्रम संवत् 1130, तद्नुसार अंग्रेजी दिनांक 29 जनवरी 1074 को होना माना जाता है। इनके पिता का नाम श्री ताहर देव और माता का नाम रामकुमारी था। उनका जन्म राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल नामक गांव में हुआ। आमतौर पर उनकी मान्यता नागों के देव के रूप में भी है।
श्री तेजा जी महाराज गो रक्षा, कर्तव्य पालन और वचन के धनी के रूप में विशेष प्रसिद्ध हैं। एक बार तेजा जी गो रक्षा हेतु जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने एक जलते हुए सांप को बचाया लेकिन सांप ने उन्हें श्राप दे दिया और डसने की इच्छा जताई। तेजा जी महाराज ने कहा कि वे गो रक्षा के लिए जा रहे हैं। लेकिन वे वचन देते हैं कि जब लौट कर आएंगे तो सर्प की इच्छा पूरी करेंगे। ऐसा वचन देकर वे युद्ध में चले गये। गो रक्षा में युद्ध जीत कर वापस आए तो इनका शरीर पूरी तरह से रक्त से सना हुआ था। सांप ने कहा कि आपके शरीर पर ऐसी कोई जगह नहीं है जिस पर मैं डस सकूं तो तेजाजी महाराज ने अपनी जीभ पर सांप को डसने के लिए कहा। इसलिए तेजाजी महाराज वचन पालन के लिए बलिदान देने वाले देवता भी कहे जाते हैं।
श्री भाद्रपद शुक्ल की दशमी तिथि, शनिवार विक्रम संवत् 1160, तद्नुसार अंग्रेजी दिनांक 28 अगस्त 1103 को 29 वर्ष की आयु में बलिदान दिया। इसलिए भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आम बोलचाल की भाषा में तेजा-दशमी कहा जाता है।
जन मानस में श्री तेजाजी महाराज का बलिदान दिवस तेजा-दशमी को एक त्योहार के रूप में मान्यता प्राप्त है। आपको लोक देवता के रूप में सर्वत्र पूजा जाता है।
- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।