छाया दान क्या है
छाया दान कैसे किया जाता है
भारत और शेष विश्व में दान की अपार महत्ता कही गई। माना जाता है कि जिसकी जितनी क्षमता होती है उसी तुलना में दान करना चाहिए। महाभारत काल में जब दक्ष ने सम्राट युधिष्ठिर से प्रश्न किये तो उन प्रश्नों में एक प्रश्न यह भी था कि मरणासन्न मनुष्य का मित्र कौन है? तब युधिष्ठिर ने उत्तर दिया कि मरते हुए मनुष्य का मित्र दान होता है। इसलिए दान का महत्व सीमाओं और समय से परे है। दान-पुण्य का जितना महत्व आदि काल में था उतना ही महत्व आधुनिक काल में है। साधारण व्यक्ति से लेकर अरबपति तक दान करते हैं। इसलिए सभी को अपनी क्षमता के अनुरूप प्रतिदिन कुछ न कुछ दान या पुण्य करते रहना चाहिए।
छाया दान शनि के निमित्त किया जाता है। आप इसे आसान भाषा में कह सकते हैं कि शनि की प्रसन्नता के लिए छाया दान किया जाता है। छाया दान से शनि प्रसन्न होकर शुभ फल देने लगता है। इसलिए कहा जा सकता है कि छाया दान मुख्यतः शनि की शान्ति के लिए किया जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि को ग्रहों की फेहरिस्त में न्यायाधीश का पद प्राप्त है। इस नाते शनि को व्यक्ति के पूर्व जन्मों के अनुसार अच्छे या बुरे फल देने का काम मिला हुआ है। यदि आपको शनि की महादशा या अन्तरदशा चल रही है और आपने पूर्व जन्म में कुछ अच्छे काम किये हैं तो ठीक है अन्यथा जय सीया राम। क्योंकि बुरे कर्मों का फल आपको भोगना पड़ेगा।
अब सवाल यह उठता है कि यह कैसे तय किया जाए कि आपने पूर्व जन्म में अच्छा किया या फिर बुरा। तो इसके लिए जन्म कुंडली में शनि की स्थिति को देखें। यदि शनि जन्मांग चक्र में शुभ स्थिति में है तो यह इस बात का प्रमाण है कि आपने पूर्व जन्म में जरूर कुछ अच्छे कर्म किये हैं। यदि शनि अशुभ स्थिति में है तो समझ लें कि आपके पापों को घड़ा भर चुका है और शनि महाराज अपनी दशा में इसका हिसाब चुकता करेंगे।
छाया दान क्या है और कैसे करें
जब यह तय हो जाए कि शनि की अच्छी स्थिति में नहीं है तो उसकी महादशा या फिर अन्तर्दशा के आरम्भ होने से पूर्व ही उसके उपाय करने चाहिए। वैसे तो शनि की शान्ति के अनेक उपाय हैं। जिनमें मंत्र जाप और दान प्रमुख हैं। लेकिन छाया दान इनमें सर्वोत्तम माना गया है। छाया दान बहुत आसान और बहुत कम खर्च में हो जाने वाला दान है। इसके लिए आपको केवल एक लोहे का थाली या कढ़ाई जैसा बर्तन और खाद्य तेल चाहिए। तेल सरसों का लेना चाहिए। लेकिन यह उपलब्ध नहीं हो तो कोई भी खाने योग्य तेल लिया जा सकता है।
छाया दान की प्रक्रिया
- बर्तन और तेल को एक दिन पहले घर में ले आना चाहिए।
- छाया दान के लिए शनिवार, अमावस्या, पुष्य नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र या फिर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के दिन करना चाहिए।
- यदि अमावस्या या नक्षत्र शनिवार को हो तो श्रेष्ठ हैं। यदि नक्षत्र और अमावस्या का दिन नहीं मिले तो किसी भी शनिवार को कर सकते हैं।
- छाया दान हमेशा रात्रि के समय करना चाहिए।
- छाया दान के लिए बर्तन और तेल को घर से शनि मंदिर ले जाएं।
- शनि मंदिर में जाकर तेल को लोहे के बर्तन में डाले।
- अब इस तेल में अपनी छाया, परछाई या शक्ल देखें।
- अच्छी तरह से शक्ल देख कर उस बर्तन को तेल सहित शनि महाराज का समर्पित कर दें।
- शनि महाराज से शान्ति की प्रार्थना करें।
- इसके बाद बिना पीछे देखें घर आ जाएं।
- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।
विशेष सूचना - (डिस्क्लेमर या अस्वीकरण) यहां दी गई जानकारी प्रचलित मान्यताओं, पंचांग और दूसरे धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। उपरोक्त तथ्यों को केवल जानकारी देने के लिए लिखा गया है। वास्तविकता इससे अलग हो सकती है। गाइडगुरु.काॅम इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।