श्वेतार्क गणपति की स्थापना से प्राप्त करें ऋद्धि सिद्धि
शास्त्रों में सफेद आक, उसकी लकड़ी और जड़ को बहुत महत्व दिया गया है। इसे श्वेतार्क या सफेद मदार भी कहते हैं। प्रायः घरों में श्वेतार्क को लगाने की पुरानी परंपरा है। लेकिन श्वेतार्क की जड़ को विशेष महत्व प्राप्त है। पुरानी मान्यताओं, हिंदू धर्म, ज्योतिष और वास्तु में इसे विशेष प्रभावी माना जाता है। इसे एक बेहद चमत्कारी लकड़ी या जड़ कहा गया है।
श्वेतार्क गणपति प्रतिमा
श्वेतार्क से बनी हुए भगवान श्री गणपति की प्रतिमा को खास प्रभावी माना जाता है। इस मूर्ति की निरंतर पूजा से घर से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। धन लगातार आता रहता है। समाज में मान प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
सफेद आंकड़े से मूर्ति बनाने के लिए लगभग 3 वर्ष पुराने आक के पौधे का चुनाव करना चाहिए। कोशिश करें कि वही पौधा काम में लें जो कि प्राकृतिक तौर पर सूखा हुआ हो। उसकी जड़ लाकर किसी सिद्धहस्त खाती बढ़ई से उसकी प्रतिमा बनवानी चाहिए। इस प्रतिमा को किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर के मंदिर में प्रतिष्ठित करें और प्रतिदिन इसकी सामान्य पूजा करते रहें।
क्या लाभ होंगे
श्वेतार्क गणपति की स्थापना से बिजनेस में विशेष लाभ होता है। जो लोग गलत निर्णयों के कारण परेशानी में रहते हैं। अर्थात समय पर बुद्धि काम नहीं करती है उनके लिए श्वेतार्क गणपति की स्थापना चमत्कार करती है।
संतान प्राप्ति के लिए श्वेतार्क गणपति की स्थापना विशेष प्रभावी मानी गई है। संतान का न होना या संतान का स्वास्थ्य खराब रहना जैसी समस्याओं के निवारण के लिए श्वेतार्क गणपति की स्थापना करें।
घर में सगाई-विवाह जैसे मांगलिक काम नहीं हो रहे हों तो आवश्यक तौर पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना से लाभ होता है।
जिन लोगों की जन्म कुंडली या हाथों में सूर्य की स्थिति कमजोर हो उन्हें भी श्वेतार्क गणपति की स्थापना करनी चाहिए। गले में श्वेतार्क की जड़ को धारण करना भी सूर्य को बलवान बनाती है। - ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।
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