क्या है रिक्तिया भैरव मंदिर का इतिहास
राजस्थान के चूरू जिले में बहुत से जगत प्रसिद्ध मंदिर है। जिनमें सालासार बालाजी, साण्डन माता मंदिर और मालासी का रिक्तिया भैरव मंदिर सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। इनमें श्री रिक्तिया भैरव जी को लोक देवता की संज्ञा प्राप्त है। यह मंदिर रतनगढ़ से सालासर मार्ग पर स्थित है। सालासर से उत्तर में लगभग 15 किलोमीटर और रतनगढ़ से लगभग 25 किलोमीटर दक्षिण दिशा में है। यह मंदिर मालासी नाम के एक गांव में स्थित है। इस मंदिर की मान्यता न केवल राजस्थान बल्कि गुजरात, दिल्ली और हरियाणा तक है। भक्त लोग विवाह के बाद वर-वधू के जोड़े के तौर पर यहां दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद उसके बाल उतारने की भी लोक परंपरा है। इस परंपरा को आम बोलचाल की भाषा में जडूला उतारना या मुंडन करना भी कहते हैं। यह एक ऐतिहासिक लोकदेवता मंदिर है। इसके कई नाम प्रचलित हैं जैसे कुएं वाले भैंरूजी, मालासी भैरूजी और रिक्तिया भैरू जी आदि।
क्या है इतिहास
इसका इतिहास दो प्रमुख जातियों से जुड़ा हुआ है। लोक मान्यताओं के अनुसार राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक गांव है खिरोड़। इस गांव के रिक्ता राम नामक एक व्यक्ति का ससुराल मालासी गांव में था। एक बार रिक्ता राम अपनी ससुराल मालासी आए। कहा जाता है कि उनके साले और सालियों ने मजाक करने के उद्देश्य से उनको एक कुएं में उल्टा लटका दिया। लेकिन रस्सियों के टूटने से रिक्ता राम जी कुएं में गिर गये और उनकी मृत्यु हो गई। बाद में कुएं से आवाज आई कि वे भैरू जी हैं और उन्हें लोक देवता के रूप में पूजा जाए। बाद में इसी कुएं को मूर्ति का गर्भगृह माना गया है और वहां एक पत्थर मूर्ति के रूप में स्थापित है।
मेला कब लगता है
आमतौर पर विक्रम संवत् के आश्विन और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में रविवार और मंगलवार को विशेष मेलों का आयोजन होता है। श्री भैंरूजी को तेल चढ़ाया जाता है और लड्डू का भोग लगता है।
मंदिर के स्वामित्व के लिए संघर्ष
जिस कुएं पर मंदिर बना है वह राजपूत समाज का है और रिक्ता राम जी जाट समुदाय से आते हैं। इसलिए मंदिर के स्वामित्व के लिए दोनों जातियों में खूनी संघर्ष हुआ है। जिसमें कुछ लोगों की मृत्यु भी हो गई।
कैसे जाएं
सड़क मार्ग के लिए सुजानगढ़, रतनगढ़ और फतेहपुर में स्टेट हाई-वे और नेशनल हाई-वे उपलब्ध हैं जो कि मालासी ग्राम से लगभग 25 से 40 किलोमीटर दूर हैं। निकटतम रेल-वे स्टेशन रतनगढ़ है। हवाई यात्रा के लिए निकटतम हवाई-अड्डा जयपुर है, जो करीब 200 किलोमीटर है।
- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।
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