वास्तु में क्या है ब्रह्म-स्थान का रहस्य
वास्तु हमारे जीवन को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभावित करता है। यदि घर में गंभीर वास्तु दोष है तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानी रहेगी, आमदनी नहीं होगी, कर्ज की पोजीशन रहेगी और घर के सदस्य धीरे-धीरे कम होंगे। इसलिए किसी भी घर को वास्तु के अनुरूप ही होना चाहिए।
हमेशा ध्यान रखें कि घर का हम निर्माण करते हैं और उसके बाद घर हमारा निर्माण करता है।
आज हम वास्तु के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग के बारे में इस आर्टिकल में चर्चा करेंगे, वह है ब्रह्मस्थान।
वास्तव में किसी भी घर में या इमारत में ब्रह्म स्थान का महत्व मुख्य द्वार के बाद सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए आप कह सकते हैं कि जिन घरों में, बिजनेस प्लेस, फैक्ट्री में यदि ब्रह्म स्थान शुद्ध और वास्तु के अनुरूप नहीं है तो उन घरों से लोग पलायन कर जाते हैं। मैंने कुछ मामलों में ब्रह्म-स्थान के पीड़ित होने पर जेल जाते लोग भी देखे हैं। इसलिए ब्रह्म-स्थान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आमतौर पर कुल कवर्ड एरिया के 10% भूमि को ब्रह्म-स्थान माना गया है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में कुछ कम या ज्यादा भी हो सकता है।
पुरानी हवेलियों में तो ब्रह्म-स्थान को खाली रखा जाता था। लेकिन वर्तमान में आधुनिक निर्माण के अंतर्गत बहुत बार कोई अशुभ निर्माण ब्रह्म-स्थान पर हो जाता है, जिसके खराब परिणाम मिल सकते हैं। कोशिश यही करें कि ब्रह्मस्थान पर कभी भी रसोई, स्टोर, टॉयलेट, सीढ़ियां, बाथरूम या बैडरूम जैसा निर्माण नहीं होना चाहिए।
वास्तव में ब्रह्म स्थान पर क्या निर्माण होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए, यह सब घर के नक्शे घर के माप आदि पर निर्भर करता है।
यदि आप भी किसी घर, शॉपिंग मॉल, फैक्ट्री, बिजनेस प्लेस या दुकान का निर्माण कर रहे हैं तो आज ही भारत प्रसिद्ध है वास्तु शास्त्री श्री सत्यनारायण जांगिड़ से वेबसाइट पर दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।



