घर में हाॅल वास्तु के अनुसार होना जरूरी है
-- ज्योतिर्विद् सत्यनारायण जांगिड़। रतनगढ़। राजस्थान।
घर का मुख्य द्वार किसी भी दिशा में हो सकता है क्योंकि किसी भी भूखण्ड के मुख्य द्वार की दिशा हम बदल नहीं सकते हैं। क्योंकि यदि हम ऐसा करने की कोशिश करेंगे तो स्वभाविक तौर पर हमें नया भूखण्ड खरीदना पड़ेगा। और एक सामान्य व्यक्ति के लिए ऐसा करना संभव नहीं है।
ज्यादातर लोग अपने जीवन में केवल एक ही घर बनाने में सक्षम होते हैं। इसलिए सभी के लिये यह संभव नहीं है कि वे अपनी मर्जी के अनुसार घर की दिशा को बदल सकें।
लेकिन कोई भी व्यक्ति अपने घर में वास्तु के अनुसार निर्माण जरूर कर सकता है। इसके लिए उसे किसी अतिरिक्त खर्च की जरूरत नहीं है। भूखण्ड चाहे किसी भी दिशा में हो लेकिन यदि निर्माण वास्तुशास्त्रानुसार है तो निश्चित तौर पर सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है।
सभी घरों में सदस्यों की संख्या के आधार पर कमरे बने होते हैं। आमतौर पर मध्य में हाॅल होता है। किसी भी घर में हाॅल सबसे अधिक प्रभावशाली निर्माण होता है। इसलिए हाॅल को हमेशा वास्तु के नियम फाॅलो करते हुए बनाना चाहिए। मैं अपने प्रिय पाठकों के लिए हाॅल के लिए कुछ वास्तु सूत्रों को यहां दे रहा हूं।
हाॅल को हमेशा भुजाप्रसार के नियम से बना होना चाहिए।
हाॅल की लम्बाई उसकी चौड़ाई से दुगने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
हाॅल की छत्त पर वेंटिलेशन हमेशा मध्य में होना चाहिए। यदि यह मध्य में नहीं है तो उसे उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
हाॅल में दो दरवाजे रखने चाहिए। जिसमें से कम से कम एक दरवाजा तो उत्तर या पूर्व दिशा में खुलना जरूरी है।
हाॅल में उत्तर दिशा हमेशा सुरक्षित रहनी चाहिए।
आमतौर पर सीढ़ियां हाॅल में ही बनाई जाती है लेकिन सीढ़ियों को कभी भी हाॅल की उत्तरी या पूर्वी दीवार से सट कर नहीं होना चाहिए।
यदि हाॅल में टाॅयलेट हो तो उसके दरवाजे को काम में लेने के अतिरिक्त बंद रखना चाहिए।
हाॅल में टी.वी. या एलसीडी हमेशा पूर्वी दीवार पर होना चाहिए।



