सांवलिया सेठ को पार्टनर कैसे बनाएं
राजस्थान में एक जिला है चित्तौड़गढ़। यहां से करीब 28 किलोमीटर दूर, उदयपुर मार्ग पर श्री सांवलिया सेठ का भारत प्रसिद्ध मंदिर है। आम बोलचाल की भाषा में इसे कुछ लोग सांवरिया सेठ भी कहते हैं। लेकिन वास्तव में यह सांवलिया सेठ है। वैसे भगवान तो भक्त की आस्था और विश्वास देखते हैं। नाम में कुछ नहीं रखा है। जैसे गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मेरे भक्त मुझे अनेक नामों से जानते हैं। वे जिस नाम से प्रेम से पुकारते हैं मैं उसी नाम से उनके समक्ष आता हूं।
सांवलिया सेठ भगवान श्री कृष्ण का एक चमत्कारी स्वरूप है। माना जाता है कि श्री सांवलिया सेठ की मूर्ति साल 1840 में एक खुदाई में प्रकट हुई थी। मान्यता यह भी है कि यह वही मूर्ति है जिसकी पूजा मीराबाई किया करती थी। मूर्ति को मुस्लिम आक्रांताओं से बचाने के लिए जमीन में दबाया गया था। यही मूर्ति सांवलिया सेठ के रूप में मंदिर स्थित है।
कैसे जाएं
श्री सांवलिया सेठ का मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से उदयपुर मार्ग पर लगभग 28 किलोमीटर दूर है। चित्तौड़गढ़ के रेल-वे स्टेशन से 40 किलोमीटर और एयरपोर्ट से यह दूरी 65 किलोमीटर है। यह मंदिर देवस्थान विभाग के अंतर्गत आता है। यह मंदिर भारत के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है।
सांवलिया सेठ को पार्टनर कैसे बनाएं
पूरे संसार में यही एक ऐसा मंदिर है जिसके आराध्य देव को लोग बिजनेस पार्टनर बनाते हैं। शायद इसका कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। जो लोग बिजनेस में समस्याओं का सामना कर रहे हैं या जिनको पर्याप्त लाभ नहीं होता है। वे भगवान श्री सांवलिया सेठ को अपने बिजनेस में एक निश्चित प्रतिशत की हिस्सेदारी देते हैं। मान्यता है कि इस प्रकार से उनका बिजनेस चलने लगता है। अब सवाल यह है कि ऐसा किस तरह से करना चाहिए। अर्थात् इसकी क्या प्रक्रिया है।
वैसे तो भगवान और भक्त का प्रेम निस्वार्थ होता है। लेकिन यह आधुनिक युग है। इसमें धन का महत्व दूसरी सभी बातों से ज्यादा है। इसलिए लोग अपनी मर्जी से भगवान को हिस्सेदारी देते हैं। यदि आपका बिजनेस भी मंदा है तो आप भी ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए कोई निश्चित मापदंड नहीं है। आप मन में ही विचार कर लें कि आज से श्री सांवलिया सेठ मेरे बिजनेस पार्टनर है और जितना मुझे लाभ होगा उसका एक निश्चित प्रतिशत में भगवान की सेवा में देता रहूंगा। यदि यही एग्रीमेंट आप विधिवत करना चाहते हैं तो एक स्टांप पर एग्रीमेंट भी लिख सकते हैं। कुछ लोग ऐसा करते भी हैं। एग्रीमेंट आप अपने जीवन भर के लिए भी कर सकते हैं या फिर कुछ वर्षों के लिए भी कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि अपनी बात पर कायम रहें और मंदिर में प्रॉफिट की हिस्सेदारी देते रहें।
- ज्योतिर्विद सत्यनारायण जांगिड़
विदुरजी के मंदिर के पास। रतनगढ़। राजस्थान।
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